अक़ीदत के साथ संपन्न हुई जिक्र ए शहीदाने कर्बला कांफ्रेंस

भवानी मंडी/झालावाड़: शहर की गरीब नवाज कॉलोनी में जिक्र ए शहीदाने कर्बला कांफ्रेस का बड़ी ही अक़ीदत के साथ आयोजित की गई। इस अवसर पर जयपुर से आए विश्व विख्यात इस्लामिक स्कॉलर हजरत सैय्यद मुहम्मद कादरी साहब ने हजरत ईमाम हुसैन की शान बयान की। उन्होने अपनी तकरीर में कहा कि हजरत ईमाम हुसैन के मानने वाले सिर्फ मुसलमान ही नहीं है। बल्कि हिंदू, सिख, ईसाई हर धर्म के लोग हजरत ईमाम हुसैन को अपना मानते है। उनका पैगाम भी किसी एक धर्म या वर्ग तक ही सीमित नहीं है। बल्कि उनका पैगाम सार्वभौमिक है। इसलिए आज हर धर्म का अनुयायी हजरत ईमाम हुसैन को अपना मानता है।

उन्होने बताया कि गुरुनानक देव ने अपने अनुयायियों से कहा कि हजरत ईमाम हुसैन मुसलमानों के पेशवा नहीं बल्कि इंसानियत के पेशवा है। उन्होने अपने प्राणों की आहुति देकर पूरी मानवता को बचाया। आज किसी बहन, बहू, बेटी की इज्जत सलामत है तो वह हजरत ईमाम हुसैन की शहादत से ही है। उन्होने नेल्सन मंडेला के बारे में बताया कि जब मंडेला को जेल में पूरे 20 साल गुज़र गए तो एक रात उन्होने फ़ैसला कर लिया था कि वह अगली सुबह हुकूमत की सारी शर्तों को मान कर ख़ुद को उनके हवाले कर देंगे, लेकिन अचानक उसी रात उन्हे कर्बला की दास्तान और हजरत इमाम हुसैन की शिक्षाओं ने हिम्मत और हौसला दिया कि जब कर्बला में इतने सख़्त हालात और इतनी कठिन परिस्तिथियों में हजरत इमाम हुसैन ने ज़ुल्म के आगे घुटने नहीं टेके और यज़ीद की बैअत नहीं की तो मैं नेलसन मंडेला क्यों ज़ुल्म के आगे झुक जाऊं। आखिरकार उन्हे दक्षिण अफ्रीका को स्वतंत्र कराने में सफलता मिली।

सैय्यद मुहम्मद कादरी साहब ने कहा कि कर्बला की दास्तान ज़ालिमों से मुक़ाबला करने की सीख देती है। जुल्म करने वाला कितना ही बड़ा और ताकतवर क्यों न हो। उसके आगे हरगिज न झुका जाये। इस मौके पर काजी अब्दुल वहाब साहब, मौलाना वसीम रज़ा कादरी साहब, मौलाना अकरम निजाम साहब आदि मौजूद रहे।

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