लोगों का रुझान पीतल के मेटल वर्क की तरफ फिर बढ़ा

मोहम्मद अकरम / हैदराबाद

बदलते समय के साथ हमारे समाज का एक बड़ा तबका ऐसा भी है, जो हाथ से बने हुए सामानों के इस्तेमाल को प्राथमिकता देते हैं. उसे हाथ के बने हुए सामानों में अपनी मिट्टी की खुशबू का एहसास होता हैं. यूपी के रामपुर के रहने वाले मोहम्मद आसिफ अपने हाथ से लोहे के सामान को तैयार करके बाजार मे बेचते हैं. उनके हाथ से बने हुए सामान को समाज का हर तबका अपने घरों में सजा कर घर की खूबसूरती बढ़ाने की कोशिश करता है. आसिफ वह हर सुबह और शाम आग की तपिश पर पीतल को खूबसूरत अंदाज में घरों को सजाने के लिए तैयार करते हैं. इस काम को मेटल आर्ट एण्ड डेकोरेशन भी कहते हैं, जिसकी शुरुआत 19वीं सदी मे हुई थी.

आवाज-द वॉयस से बात करते हुए मोहम्मद आसिफ ने बताया कि उन्हें ये काम पूर्वजों से मिला है, जिसमें दिन-रात मेहनत करके वे अपनी रोजी रोटी कमाते हैं. इस काम में रामपुर के ज्यादातर घरों के लोग जुड़े हुए हैं, जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिलता हैं.

पीतल की कटिंग करने से लेकर उसे डिजायन करने और पेन्ट करके बाजार में लाने तक कई लोगों का योगदान होता हैं. एक मेटल वर्क को तैयार करने में तीन दिन लग जाते हैं और बड़े काम में पंद्रह से बीस दिन भी लग जाते हैं.

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मोहम्मद आसिफ ने एक सवाल के जवाब में बताया कि लॉकडाउन में दाने-दाने के लिए मोहताज हो गए थे. काम नहीं के बराबर होता था, फिर भी हमने हिम्मत नहीं हारी. इसी में लगे रहे. हां मोदी सरकार ने हम जैसे लोगों को बाजार में लाकर मदद की है, जिसके कारण अब हमारा सामान आम लोग खरीद रहे हैं. हमने अपनी दुकान देश के कई शहरों सूरत, दिल्ली और भोपाल में लगाई हैं, जहां लोग हाथ से बने सामान खरीदते है.

बदलते समय के साथ लोगों के मिजाज में बदलाव आया है. लोग कम पैसे में प्लास्टिक के बने हुए सामान खरीद कर घरों को सजाते हैं, जो जल्द ही खराब हो जाता है, लेकिन हाथ के बने हुए ये सामान सालों तक घरों की खूबसूरती को बढ़ाता हैं. अब लोग इन्हें खरीदने लगे हैं. बहुत सारे लोग तो एकसाथ कई-कई हजार रुपये के सामान लेकर जाते हैं.

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वह आगे बताते हैं कि शुरुआती समय में इस पेशे को 20 हजार रुपये की लागत से शुरू किया था, जो धीरे-धीरे अब लाखों में पहुंच चुका है. हमारे साथ इससे कई लोगों को रोजगार मिल रहा है. जैसे हमारे साथ काम करने वाले दर्जनों युवाओं और घर में रहने वाली महिलाएं भी जुड़ी हैं, जो प्रति माह 15 से 20 हजार रुपये कमा लेती हैं.

आसिफ आगे कहते हैं कि इस पेशे से सलाना लाखों रुपये कमाता हूं. इस काम में लोगों को आगे आना चाहिए. लोग बहुत शौक से मेटल वर्क खरीदकर सऊदी अरब, दुबई, अमेरिका, पाकिस्तान जैसे देशों में ले जाते हैं.

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ऑनलाइन भी लोग इसकी मांग कर रहे हैं, जल्द ही हम दूर के देशों तक ऑनलाइन से बिक्री भी करेंगे.

उन्होंने कहा कि नौजवानों और बेरोजगारों को चाहिए कि वह कुछ नये आइडिया केे साथ सामान बाजार में लाएं, तो दुनिया उसे हाथों-हाथ लेगी और कमाई लाखों में कर सकेंगे.

साभार: आवाज द वॉइस

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