स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए उलेमाओं के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता: मौलाना मोइन मियां

मुंबई: आल इंडिया सुन्नी जमीयत उलेमा के कार्यालय में इस्लामी विद्वानों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता पीर तारिकत रहबर शरीयत हजरत अल्लामा मौलाना अलहाज सैयद मोइनुद्दीन अशरफ अशरफी जिलानी ने की। इस दौरान उन्होने देश के हालात को देखते हुए सरकार को ऐसी चीजों से बचना चाहिए जिससे मुसलमानों का दिल टूट जाए। सरकार को हर धर्म के पूजा स्थलों का सम्मान करना चाहिए।

उन्होने उपस्थित उलेमाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमें मौजूदा दौर में देश के हालात पर नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उनके बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि अल्लामा फजल खैराबादी का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाना चाहिए था, क्योंकि उन्होंने देश की आजादी के लिए सच को अंग्रेजों के सामने रखा था। उन्होने ये भी कहा कि हम सब देशभक्ति का झंडा फहराते हैं और ऐसा करते रहेंगे।

आल इंडिया सुन्नी जमीयत उलेमा को और अधिक गतिशील और सक्रिय बनाने के लिए उपाध्यक्ष पद के लिए रजा अकादमी के संस्थापक कायद-ए-कौम अल्हाज सईद नूरी को चुना गया। सईद नूरी ने कहा कि में आल इंडिया सुन्नी जमीयत उलेमा को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा जो मेरे योग्य है। मैं हर सेवा के लिए मौजूद हूं। मोईन अल-मशाईख सबसे अच्छे नेता हैं, निश्चित रूप से आपके नेतृत्व में यह संगठन होगा सफलता के पथ पर हो। यूपी से आए धर्मगुरु मुफ्ती सुल्तान रजा साहब ने कहा कि मोईन उल-मशाईख को संगठन का अध्यक्ष बनाना इस बात का सबूत है कि पहले जो ठहराव था वह अब खत्म होगा। उन्होंने कहा कि इसकी शाखा हर शहर में है।

मदनपुरा की सुन्नी मस्जिद के इमाम हजरत अल्लामा मौलाना मुफ्ती जुबैर बरकाती ने कहा कि संगठन के काम के लिए हम सब मौजूद हैं और मोईन मोईन उल-मशाईख तैयार हैं। मौलाना निजामी ने कहा कि लोगों को इससे जोड़ने का समय है। मौलाना अमानुल्लाह रज़ा ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने इस संगठन के माध्यम से बहुत काम किया है, उनके नक्शेकदम पर चलकर और काम किया जाएगा। स्कूल पर ध्यान देना चाहिए, इसके अलावा कारी नियाज़, कारी ऐनुद्दीन, कारी मुश्ताक तिघी, मौलाना मंतुल्ला, कारी गुलजार, कारी निजामुद्दीन, कारी राशिद, मौलन इरफान अलीमी आदि भी मौजूद थे।

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