बेहतर सोसाइटी के निर्माण के लिए पड़ोसियों के अधिकारों का ख्याल रखें: इमाम

नमाज़-ए-जुमा के ख़ुतबा में मुल्क की कई बड़ी मसाजिद के इमाम ने पड़ोसीयों के हुक़ूक़ के मौज़ू पर ख़िताब करते हुए कहा कि इस्लाम ने एक तरफ़ जहां अल्लाह पाक के हुकूक की तरफ़ तवज्जा दिलाई है, वहीं बन्दों के हुक़ूक़ के बारे में भी लोगों को ताकीद की गई है। बन्दों के हुकूक में एक सबसे अहम हुक़ूक़ पड़ोसीयों के हैं।

इन्सान का अपने वालदैन, अपनी औलाद और क़रीबी रिश्तेदारों के इलावा सबसे ज़्यादा वास्ता ताल्लुक़ बल्कि हर वक़त भेंट मुलाक़ात, लेन-देन का साबिक़ा पड़ोसीयों से भी होता है और इस की ख़ोशगवारी-ओ-नाख़ुशगवारी का ज़िंदगी के चैन व सुकून और अख़लाक़ के इस्लाह-ओ-फ़साद पर बहुत गहिरा असर पड़ता है.

इमामों ने कहा कि हर इन्सान बज़ाहिर जिस्मानी रुहानी हैसियत से एक दूसरे से जितना जुदा है अख़लाक़ी व रुहानी हैसियत से ज़रूरी है कि वो इतना ही ज़्यादा एक दूसरे से घुला मिला हो, एक का वजूद दूसरे के वजूद से इतना ही पैवस्ता हो।

नबी करीम सल्ल्लाहू अलैहि वसल्लम ने अपनी तालीमात-ओ-हिदायात में हम-साएगी और पड़ोस के इस ताल्लुक़ को बड़ी अज़मत बख़शी है और इस के एहतिराम-ओ-रियाइत की बड़ी ताकीद फ़रमाई है कि इस को जन्नत जाने की शर्त और अल्लाह और इस के रसूल की मुहब्बत का मयार क़रार दिया है.

नबी करीम सल्ल्लाहू अलैहि वसल्लम ने पड़ोसीयों के बारे में बार-बार ताकीद फ़रमाई है।

हदीस है कि नबी करीमﷺ ने फ़रमाया पड़ोसीयों के (हुक़ूक़ के बारे मेरे पास जिब्रील अमीन इतनी बार तशरीफ़ लाए कि मुझे ये गुमान होने लगा कि एक पड़ोसी को दूसरे पड़ोसी की मीरास में वारिस (हक़दार क़रार दिया जाएगा।

इस हदीस मुबारक से अंदाज़ा कीजीए कि शरीयत में पड़ोसी की क़दर-ओ-मंजिलत और इस का किस क़दर एहतिराम है? अगर मुआशरती तौर पर हम पड़ोसीयों के हुक़ूक़ अदा करना शुरू कर दें तो हमारा मुआशरा जन्नत का नमूना बन जाये.

पड़ोसीयों के हुक़ूक़ हदीस मुबारक में कसरत से आए हैं। हदीस में कहा गया है कि पड़ोसी जब आपसे माली मदद मांगें तो उन की मदद करें।अगर वो क़र्ज़ मांगें तो उन्हें क़र्ज़ दो।अगर वह तंग-दस्ती को पहूंच जाएं तो उनकी तंग-दस्ती दूर करें।वह बीमार हों तो उनकी इयादत करें।

जब उनको कोई ख़ुशी हो तो मुबारकबाद दें।जब कोई ग़मी हो तो इज़हार-ए-हमदर्दी करें।इस के इलावा हर मौक़ा पर पड़ोसीयों को ख़ुशी व फ़ायदा पहूँचाने की कोशिश करें.

अगर हम अपने पड़ोसीयों के हुक़ूक़ अदा करते रहें तो हमारा मुआशरा सालिह बन जाएगा। और इस के फ़्यूज़ व बरकात से हमारी दुनिया व आख़िरत सँवर जाएगी।

क़ादरी मस्जिद शास्त्री पार्क के इमाम मुफ्ती अशफाक हुसैन क़ादरी, रतलाम के सुन्नी जामा मस्जिद के मुफ्ती बिलाल निजामी, हमीरपुर के मौलाना शाहिद मिस्बाही, जयपुर के मौलाना सैयद मुहम्मद क़ादरी, अजमेर में मौलाना अंसार फैजी, भागलपुर में मौलाना अबरार, नागपुर में मौलाना मुस्तफा रज़ा और अमन शहीद जामा मस्जिद के मौलाना तनवीर अहमद ने इसी मुद्दे पर खिताब किया।

जुमे की नमाज़ में सभी मुसलमानों से मुल्क में भाई चारा और अमन चैन की फिज़ा को कायम रखने तथा किसी भी उकसावे में न आने की अपील भी की गई।

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