दरगाह ख्वाजा साहिब में हाजिरी की समय सीमा नहीं हटाई तो रजा एकेडमी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी

अजमेर: भारत के प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती हसन संजरी (रह) का 810वां उर्स मुबारक शुरू हो गया है। लेकिन रात 8 बजे से दरगाह परिसर को खाली कराने और रात में उर्स की रस्म पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का आदेश ददूर-दूर से आने वाले जायरीन के लिए एक बड़ा झटका लगता है। इस संबंध में रजा एकेडमी के संस्थापक अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और केंद्रीय व राज्य मंत्रियों को पत्र भेजकर जायरीनों की सुविधा के लिए 8 बजे से दरगाह परिसर में उर्स आयोजित करने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होने लिखा कि शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक दरगाह ख्वाजा ग़रीब नवाज़ अजमेर शरीफ़ में शामिल होने आने वाले जायरीन के लिए हाज़िरी पर लगी रोक हटाई जानी चाहिए।

इस मौके पर अल्हाज मोहम्मद सईद नूरी ने कहा कि जब से उर्स-ए-ग़रीब नवाज़ का जश्न शुरू हुआ है, सरकार को हमारी मांगें तुरंत माननी चाहिए। सईद नूरी ने आगे कहा कि एसोसिएशन के सचिव सैयद वाहिद हुसैन ने हमे बताया कि हमने इस सबंध में स्थानीय सरकारी अधिकारियों से भी खुद संपर्क किया है लेकिन अभी तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। हालांकि, हम जिला कलेक्टर और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और सीएमओ के वरिष्ठ अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं। इस पर सईद नूरी ने कहा कि अगर मांगें तुरंत नहीं मानी गई हैं तो रजा एकेडमी जयपुर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी ताकि गरीबों को सभी सुविधाएं मिल सकें।

वहीं तहरीक-ए-दुरूद-ओ-सलाम के उपदेशक मौलाना अब्बास रिजवी ने कहा कि आश्चर्यजनक रूप से इस तरह के प्रतिबंध केवल दरगाह ग़रीब नवाज़ के परिसर में ही लगाए जाते हैं जबकि यहां हर तरह का व्यवसाय और अन्य गतिविधियां चल रही हैं। साथ ही उन्होने ये भी बताया कि अजमेर में ही “तहफ्फुज ए नामूस ए रिसालत बोर्ड” का स्थापना दिवस मनाया जाएगा।  इस दौरान उर्स में भाग लेने के लिए जायरीनो को विधेयक से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।

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