निकहत जरीन के विश्व चैंपियन बनने पर मां बोलीं-इंशाअल्लाह, वह ओलंपिक खेलों में पहुंचेगी

मलिक असगर हाशमी /नई दिल्ली /हैदराबाद

भारतीय मुक्केबाज निकहत जरीन के माता-पिता ने इस्तांबुल में महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद खुशी व्यक्त की है. उन्होंने इसके लिए अल्लाह का शुक्रिया अदा किया है.

निकहत जरीन के पिता जमील अहमद को अपनी बेटी पर गर्व है.उन्होंने कहा कि पूरा देश इस सोने का इंतजार कर रहा था. ‘‘यह खुशी की बात है, पूरे देश ने इस सोने का इंतजार किया. देश, मुक्केबाजी बिरादरी के लोग और मुझे उस पर गर्व है.

इस बीच निकहत जरीन की मां परवीन सुल्ताना ने भी कहा, ‘‘मुझे उन पर (निकहत जरीन) बहुत खुशी और गर्व है. इंशाअल्लाह, कदम दर कदम वह ओलंपिक खेलों में पहुंचेगी.‘

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने निकहत जरीन को महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप 2022 में स्वर्ण पदक जीतने के लिए बधाई दी.मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गर्व का क्षण है. तेलंगाना के निजामाबाद जिले की रहने वाले निकहत विश्व मुक्केबाजी चैंपियन के रूप में खड़ी हैं.

निजामाबाद से तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की एमएलसी, कल्वाकुंतला कविता भी निखत जरीन को बधाई दी है.भारतीय मुक्केबाज निकहत ने फाइनल में 5-0 से दबदबे वाली जीत दर्ज की.

उम्मीदों पर खरा उतरते हुए, निकहत ने थाईलैंड के जितपोंग जुतामास को 52 किग्रा फाइनल में बिना पसीना बहाए हरा दिया, जिसमें जजों ने भारतीय पक्ष में 30-27, 29-28, 29-28, 30-27, 29-28 का स्कोर बनाया.

निकहत की उपब्धियां

निजामाबाद (तेलंगाना) में जन्मी मुक्केबाज छह बार की चैंपियन मैरी कॉम (2002, 2005, 2006, 2008, 2010 और 2018), सरिता देवी (2006) के बाद विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल करने वाली एकमात्र पांचवीं भारतीय महिला बनीं. 2018 में महान मुक्केबाज मैरी कॉम के जीतने के बाद से यह भारत का पहला स्वर्ण पदक भी था.

निकहत की उपलब्धि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी बधाई

राष्ट्रपति ने ट्विटर पर कहा, ‘‘निखत जरीन को महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक के लिए हार्दिक बधाई. देश को उन पर गर्व है. मुझे विश्वास है कि उनकी सफलता हमारे युवाओं, विशेषकर लड़कियों को अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेगी. ‘‘ इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के लिए निकहत जरीन की सराहना की.

भारतीय मुक्केबाज निकहत ने फाइनल में 5-0 से दबदबे वाली जीत दर्ज की. उम्मीदों पर खरा उतरते हुए, निकहत ने थाईलैंड के जितपोंग जुतामास को 52 किग्रा फाइनल में बिना पसीना बहाए हरा दिया, जिसमें जजों ने भारतीय पक्ष में 30-27, 29-28, 29-28, 30-27, 29-28 का स्कोर बनाया.

कौन हैं निकहत जरीन ?

उनका जन्म तेलंगाना के निजामाबाद में 14 जून 1996 को हुआ था. उनके पिता का नाम मुहम्मद जमील अहमद और माता का नाम परवीन सुल्ताना है. इस भारतीय स्टार ने 13 साल की उम्र में बाक्सिंग ग्ल्बस से दोस्ती कर ली थी. वो भारतीय मुक्केबाजी की लीजेंड एमसी मैरीकाम को अपना आदर्श मानती हैं.

अधिकार के लिए लड़ने वाली बाॅक्सर

निकहत जरीन हमेशा से ही अपने हक के लिए लड़ती आई हैं. वो अपने करियर एक बार फेडरेशन और अपनी आदर्श मैरीकॉम से भी लड़ चुकी है. दरअसल, बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने छह बार की वर्ल्ड चैंपियन एमसी मैरीकॉम को ओलंपिक में बिना ट्रॉयल के ही 51 किलोग्राम भारवर्ग में भारत का प्रतिनिधि बना दिया.

इस दौरान बीएफआई का नियम था कि महिला एवं पुरुष दोनों वर्गो में पदक विजेता खिलाड़ियों को ही ओलंपिक क्वालीफायर में भेजा दिया जाएगा. हालांकि ये नियम सिर्फ गोल्ड और सिल्वर मेडल विजेताओं के लिए था.

जिस वजह से ट्रायल में निखत को मैरीकॉम के खिलाफ उतरने भी नहीं दिया था. जिसके बाद तत्कालीन समिति के चेयरमैन राजेश भंडारी ने कहा था कि वह निखत फ्यूचर के लिए सेव कर रहे हैं.

इस बात की जानकारी जब निखत को हुई तो उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई. जिसके बाद उन्होंने खेल मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिख दिया और ट्रायल की मांग की.

जिसके बाद ट्रायल्स हुए थे. इस मैच में एमसी मैरीकाम ने जीत हासिल की थी. हालांकि इस मैच के बाद मैरीकॉम ने उनसे हाथ भीं नही मिलाया था.

साभार: आवाज द वॉइस

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