मुस्लिम समाज की जागरूकता में सकारात्मक भूमिका के लिए राष्ट्रव्यापी इमाम संगठन की ज़रूरत- इमाम

नई दिल्ली:  हज़रत निजामुद्दीन में इमामों की एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें देश के तमाम राज्यों के इमाम शामिल हुए। बैठक का आयोजन ऑल इंडिया तंजीम उलेमा ए इस्लाम और मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गेनाईजेशन ऑफ़ इंडिया ने किया था।

बैठक को संबोधित करते हुए ल इंडिया तंजीम उलेमा ए इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ्ती अश्फ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहा कि मौजूदा वक़्त और हालात को देखते हुए मुस्लिम समाज में बेदारी और उनको जागरूक करना बहुत ज़रूरी हो गया है। समाज के अंदर सकारात्मक बदलाव तभी आएगा, जब हमारे इमाम अपने ख़ुतबों के अंदर समाज की बुराईयों और विभिन्न मुद्दों पर अपने बयानात का इज़हार करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस दिन सभी इमाम मुस्लिम समाज के मसले और मसाइल का हल क़ुरआन, हदीस और सुन्नत की रौशनी में बयान करने लगेंगे, समाज के अंदर यकीनी तौर पर बेदारी आ जाएगी।

उन्होंने कहा कि इमामों का देशव्यापी स्तर पर एक संगठन की जरूरत महसुस हो रही है और यह सही वक़्त है, जब इस संगठन को बनाए जाने पर चर्चा की जानी चाहिए। क्योंकि अगर हम समाज के मुद्दों का हल चाहते हैं, तो हमें इन इमामों की मदद लेनी होगी। क्योंकि इमामों के ज़रिए एक ही वक़्त में देश की तमाम इलाक़ों में अपनी बात को पहुंचा सकते हैं

उन्होंने कहा कि हालांकि इमामों के लिए हमें कुछ गाइडलाइंस की ज़रूरत होगी, जिसके लिए समाज के दानिश्वर और स्कॉलर्स से विचार-विमर्श के बाद इसपर कार्य किया जाएगा।

बैठक को संबोधित करते हुए एमएसओ के चेयरमैन डॉक्टर शुजाअत अली कादरी ने कहा कि किसी भी समाज की तरक़्क़ी उस समाज के सकारात्मक विचारों और कार्यों से आती है। नकारात्मकता हमेशा समाज को पतन की तरफ ले जाती है। यह प्रोपोज्ड इमाम संगठन भी भारतीय मुस्लिमों के बीच सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेगी और समाज को कामयाबी की बुलंदियों पर ले जाएगी।

प्रोफेसर अखलाक अहमद उस्मानी ने पावरप्वाइंट द्वारा इमाम संगठन की रूपरेखा पर प्रकाश डाला और MSO के अध्यक्ष मुदस्सिर अशरफी ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

इस बैठक में मौलाना अंसार फैजी (अजमेर), मौलाना बिलाल, मौलाना अब्दुल ज़लील निजामी (पीलीभीत यूपी), मौलाना समीउल्लाह (राजस्थान), मौलाना सखी राठौर (कश्मीर), मौलाना सय्यद मुहम्मद (जयपुर), कारी हनीफ (मुरादाबाद), मौलाना समीर अहमद (रामपुर), मौलाना अखलाक रजा, कारी जमाल, कारी मोहम्मद अली, मौलाना शादाब, मौलाना रईसुद्दीन, मौलाना मजहर इमाम (बंगाल), मौलाना फारूक बरकाती, मौलाना मुशर्रफ, मुफ्ती तौकीर मिस्बाही, मुफ्ती असरारुल हक़, जीशान अशरफी और मौलाना शम्स सहित तमाम लोग मौज़ूद थे।

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