MSO ने सितारगंज जामा मस्जिद में शुरू की मिनी लाइब्रेरी

सितारगंज: मुस्लिम स्टूडैंटस आर्गेनाईज़ेशन आफ़ इंडिया MSO मुस्लिम छात्रों की रहनुमाई और उनकी तालीमी तरक़्क़ी के लिए लगातार कोशिश कर रही है । इसी कड़ी में एक और पेश-रफ़्त की है। MSO के ज़ेर-ए-एहतिमाम सितारगंज जामा मस्जिद में मिनी लाइब्रेरी का कयाम अमल में आया है। जिसमें छात्रों व आम लोगों के पढने के लिए किताबें मौजूद रहेंगी।

इस बारे में बात करते हुए मुस्लिम स्टूडैंटस आर्गेनाईज़ेशन आफ़ इंडिया के राष्ट्री अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद मुदस्सिर ने बताया कि MSO ने अब तक कई मस्जिदों और कैंपसों में मिनी लाइब्रेरी कायम किया है। उन्होंने कहा कि हमारा मक़सद यही है कि जहां पर लोगों में तालीमी बेदारी नहीं है। और कम तालीम याफ़ता हैं। उनकी तालीमी बेदारी के लिए और उनके मुस्तक़बिल को रोशन बनाने के लिए कोशिश की जाये।और ये क़दम इसी लिए उठाया गया है। उन्होंने बताया कि जहां पर भी मिनी लाइब्रेरी का बनाया गया है, वहां पर मज़हबी किताबों के इलावा साईंस,समाजी उलूम व दूसरी विषय की किताबें भी मौजूद हैं।

सितार गंज में मिनी लाइब्रेरी के कायम के वक़्त ख़िताब करते हुए मुबीन अहमद जामई सब ऐडीटर यू एन आई ने कहा कि जिस मज़हब के लोग किताबें पढ़ते हैं, और उनके लिटरेचर ज़्यादा होते हैं।वो मज़हब और जमात तरक़्क़ी करती है। और उन्हीं का दबदबा क़ायम रहता है। जो तालीम याफ़ता रहते हैं। वही कामयाब होते हैं। और तरक़्क़ी करते हैं। उन्होंने लाइबेरी के फ़ायदे बताते हुए कहा कि जहां पर किताबिं मौजूद होती हैं।तो लोग पढ़ते हैं, और वालदैन भी अपने बच्चों को ऐसी जगह पर भेजते हैं। ताकि उनकी अच्छी तर्बीयत हो सके। और अपने मुस्तक़बिल को सँवार सकें।

इस मौके पर मुफ़्ती मुहम्मद क़ासिम मिसबाही ख़तीब व इमाम जामा मस्जिद सितार गंज ने कहा कि आज यहां पर लाइब्रेरी का कयाम अमल में आया है। और अब लोगों को चाहीए कि किताब पढ़ने के लिए लाइबेरी में आएं। उन्होंने कहा कि जो लोग भी इस लाइबेरी में आएँगे उन्हें दो फ़ायदे होंगे। एक तो किताब का मुताला करेंगे। और उनकी मालूमात में इज़ाफ़ा होगा। वहीं दूसरा जब वो मस्जिद में आएँगे तो एतिकाफ़ की नीयत कर लेंगे तो इस का भी अज्र उन्हें मिलेगा।

प्रोग्राम की निज़ामत मौलाना आरिफ़ क़ादरी वाहिदी अध्यक्ष MSO उत्तराखंड ने की।प्रोग्राम का इख़तताम मुफ़्ती मुहम्मद क़ासिम मिस्बाही की दुआ पर हुआ। इस प्रोग्राम में मौलाना तस्लीम अज़हरी,मौलाना आरिफ़ नूरी, हाफ़िज़ यूसुफ़ वाहिदी, मुहम्मद ताबिश वाहिदी, मुहम्मद आतिफ़,मुहम्मद आरिफ़ सैक्रेटरी जामा मस्जिद समेत इलाक़ा के लोग मौजूद थे।

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