पैगाम ए सुन्नत कांफ्रेंस में दिया सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का संदेश

हजरत अल्लामा मौलाना मोहम्मद शाकिर नूरी अली साहब

– दिलशाद नूर

झालावाड़: यूनाइटेड इंडियंस वेलफ़ेयर सोसाइटी की ओर से सोमवार रात को बाद नमाज ईशा शहर के ईदगाह मैदान में एक अज़ीमुश्शान पैगाम ए सुन्नत कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमे बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए।

कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए विश्व विख्यात इस्लामिक स्कॉलर अमीर सुन्नी दावत ए इस्लामी हजरत अल्लामा मौलाना मोहम्मद शाकिर नूरी अली साहब ने समाज में बढ़ रहे पारिवारिक विघटन पर चिंता जताई। उन्होने कहा कि घरों में आज आपसी कलह से परिवार टूट रहे है। भाई-भाई में, पिता-पुत्र में, सास-बहू में, पति-पत्नी में लड़ाई-झगड़ा है। इसका सबसे बड़ा कारण अहंकार है। यदि अहंकार का त्याग कर दिया जाए तो समाज में फिर से खुशहाली आ सकती है। उन्होने इसके लिए पैगंबर मुहम्मद साहब की शिक्षाओं पर अमल करने पर जोर दिया। उन्होने बताया कि पैगंबर मुहम्मद साहब ने लोगों को उनकी गलतियों को लेकर माफ करने पर जोर दिया। उन्होने बताया कि पैगंबर मुहम्मद साहब का आदेश है कि यदि किसी का नौकर दिन में 70 बार भी गलतियाँ करता है तो भी उसके मालिक को चाहिए कि वह उसे माफ कर दे।

हजरत अल्लामा मौलाना सय्यद अमीनुल कादरी साहब

वहीं मालेगांव से आए हजरत अल्लामा मौलाना सय्यद अमीनुल कादरी साहब ने युवाओं को व्यभिचार, अनैतिकता और दुराचरण से दूर रहने की सलाह दी। उन्होने कहा कि आज का युवा पोर्नोग्राफी के जाल में फंसा हुआ है। नई पीड़ी तेजी से इस गंदगी की और बढ़ रही है। जिससे समाज में लेंगिक अपराध भी बढ़ रहे है। उन्होने युवाओं को उलेमाओं और सूफियों की संगत अपनाने को कहा।

हजरत मौलाना सय्यद मुहम्मद कादरी साहब

इसके अलावा हजरत मौलाना सय्यद मुहम्मद कादरी साहब ने अपने संबोधन में कहा कि पैगंबर मुहम्मद साहब सिर्फ मुसलमानों के ही नबी नही है। बल्कि वह पूरी दुनिया के लिए रहमत बन कर आए है। इस्लाम धर्म में मानवता की सेवा ही सबसे बड़ी इबादत है।

उन्होने बताया कि एक बार पैगंबर मुहम्मद साहब के सामने से किसी गैर-मुस्लिम का जनाज़ा जा रहा था तो वे जनाज़े को देखकर रो पड़े। इसी तरह हजरत बायजीद बुस्तामी को अपनी नमाज में पड़ोस में रहने वाले एक बच्चे की भूख से रोने की आवाज़ आई तो वे नमाज तोड़कर उसके लिए दूध और खाना लेकर पहुंचे। उन्होने न उसका धर्म देखा और नहीं जात-पात। उन्होने कहा कि यह ही इस्लाम धर्म की असल शिक्षा है। जिससे आज हम दूर होते जा रहे है। हमें इस्लाम के मूल अर्थ को न केवल समझना होगा बल्कि इसे अपने जीवन में भी उतारना होगा।

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