उमरान मलिक के बाद जम्मू-कश्मीर का एक और क्रिकेटर सुर्खियों में, मतीन तेली इंग्लिश टीम में

गुलाम कादिर / श्रीनगर

कश्मीर के 28 वर्षीय मतीन तेली कुछ सेकंड के लिए तब सन्न रह गए, जब उन्हें इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के अधिकारी का फोन आया. दूसरी तरफ से फोन करने वाले ने गर्मजोशी से उनका अभिवादन किया और खुशखबरी दी,“अपना बैग पैक करो और ट्रेंट ब्रिज आओ. न्यूजीलैंड सीरीज के लिए आप हमारे नेट गेंदबाज होंगे.’’

इतना सुनते ही मतीन तेली कुछ देर के लिए जैसे सन्नाटे में पड़ गए. फिर उनकी आंखों से खुशी के आंसू झलक पड़े. सोपोर के मतीन के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है. उसके खेल को कई बार जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन ने खारिज किया है. मतीन कहते हैं,तब से क्रिकेट के प्रति जैसे दिल टूट सा गया था. मन और दिमाग पर नाउम्मीदी सवार हो गई थी.

बावजूद वह खुद को हौसला देते रहे. खुद को बताते रहे कि हार स्वीकारना विकल्प नहीं. एक लड़ाकूहोने के नाते उन्हें संघर्ष करते रहना है. इसी दौरान वह क्रिकेट यात्रा जारी रखते हुए इंग्लैंड के एक क्रिकेट क्लब में शामिल हो गए.

कश्मीर के मतीन ने चार साल तक क्लब में दिल खोलकर गेंदबाजी की. जब वह नेट्स में गेंदबाजी करतेे तो उनकी गति, स्विंग और लाइन और लेंथ देखकर दूसरे साथी क्रिकेटर तारीफ किए बिना नहीं रहते थे.

उन्होंने अपनी पहली गेंद में जॉनी बेयरस्टो के स्टंप्स उखाड़ दिए थे. वह कहते हैं, मैं क्लब का खिलाड़ी हूं. यह मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से एक बड़ी उपलब्धि है. ”

मतीन बताते हैं कि उन्होंने क्लब क्रिकेट के नेट्स पर प्रभावशाली प्रदर्शन किया. उन्होंने बेयरस्टो सहित दो विकेट हासिल किए. “जब मैं गेंदबाजी करता तो बहुत सारे खिलाड़ी और कोच देख रहे थे.

अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के खिलाफ गेंदबाजी करना शानदार अहसास है और विकेट हासिल करना एक सपने के सच होने जैसा.’’एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले मतीन चार भाइयों में तीसरे हैं. वह और उनका भाई पिछले कुछ सालों से इंग्लैंड में रह रहे हैं. सोपोर में दो भाइयों का छोटा सा कारोबार है.

वह बचपन से मेधावी छात्र रहे हैं. उनकी पूरी शिक्षा दिल्ली में हुई है. उन्होंने मास कम्युनिकेशन में मास्टर किया है. इंग्लैंड में अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति मिली थी.’“

उनके भाई बिलाल तेली ने कहा, दिल्ली से कश्मीर ट्रायल के लिए कई बार आए, पर उन्हें कभी नहीं चुना गया. वह दिल्ली में रह रहे थे,लेकिन उनका दिल हमेशा कश्मीर के लिए धड़कता था. एक बार वह अंडर-19 ट्रायल के लिए दिल्ली से आए थे.

उनसे कहा गया किआपको देरी हो गई है. उन्हें नहीं पता था कि यह रणजी ट्रायल है. उनका चयन नहीं हुआ. बिलाल ने बताया, जब से मतीन के बारे में खबर आई, सोपोर के तेली परिवार में फोन बजना बंद नहीं हुआ. “

वह बताते हैं कि भाई कई बार टूर्नामेंट खेलने कश्मीर आते थे. उसका चयन नहीं होने से हताशा का शिकार हो गए. एक समय तो उन्होंने क्रिकेट छोड़ने का फैसला कर लिया था. मैंने उन्हें प्रोत्साहित किया. फिर वह लंदन चले गए जहां एक क्लब में शामिल हो गए.

क्रिकेट के जुनून ने कभी उनका पीछा नहीं छोड़ा.भाई बताते हैं,मतीन का जीवन संघर्षों से भरा रहा है. “ वह बताते हैं कि उन्हेंशाम को चयन के बारे में अच्छी खबर मिली, जबकि सुबह तक सूची में नाम नहीं था.

बिलाल ने बताया कि भाई के दोस्तों ने हमेशा उन्हें हिमाचल जैसे अन्य राज्यों के लिए खेलने की सलाह दी, पर एक कश्मीरी होने के नाते वह जम्मू-कश्मीर के लिए खेलना चाहते थे.

उन्होंने जब जम्मू-कश्मीर के लिए प्रयास किया तब युवावस्था में थे. अब 28 साल के हैं. उल्लेखनीय है कि हाल में जम्मू कश्मीर राज्य के जम्मू के रहने वाले उमरान मलिक का भारतीय टीम में चयन हुआ है.

वह इस समय साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेल रहे हैं. अब मतीन तेली इंग्लिश टीम के लिए खेलेंगे. दिलचस्प बात यह है कि हाल में क्रिकेट जगत में सुर्खियों बटोरने वाले जम्मू कश्मीर के ये दोनों खिलाड़ी तेज गेंदबाज हैं.

साभार: आवाज द वॉइस

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