कौकब रिजवानः बेगूसराय की पहली मुस्लिम बेटी बनी पायलट

राकेश चौरासिया / नई दिल्ली-बेगूसराय

यहां की एक बेटी कौकब रिजवान ने पायलट बनकर अपने शहर का नाम रोशन किया है. कौकब इस इलाके की पहली मुस्लिम महिला बन गई हैं, जिन्होंने पायलट की परवाज हासिल की है. कौकब की कहानी संघर्ष से जूझने की कहानी है, तो दीगर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.

जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, कौकब रिजवान बेगूसराय के पोखरिया मोहल्ला की रहने वाली हैं और उनके पिता मो. रिजवान अहमद दवा व्यापारी हैं. रिजवान और शाहीना परवीन की दो बेटियों में कौकब सबसे बड़ी हैं और उनकी छोटी बहन कौसर एमबीबीएस डॉक्टर है और आगे एमएस की पढ़ाई कर रही हैं.

मो. रिजवान अहमद बताते हैं कि कौकब की शुरुआती षिक्षा यहां के एक निजी स्कूल से हुई. उसके बाद उसने आगे की शिक्षा मुजफ्फरपुर में पूरी की. अकादिम पीरियड के दौरान कौकब ने अपनी स्पोट्समैनशिप का प्रदर्शन करते हुए वुशु कराटे में महारत हासिल की और कई मेडल जीते. उन्होंने इस खेल में ग्रीन बेल्ट भी हासिल की. बाद में वह उच्च शिक्षा के लिए खाड़ी देश के यमन चली गईं.

लेकिन कौकब का असली करियर को अभी आकार लेना बाकी था. उनका बचपन से आकाश में उड़ने का सपना था. आसमान में आते-जाते जहाजों को देखकर वह सोचा करती थीं कि क्या कभी ऐसे जहाजों में सफर करेंगी. मगर तकदीर इस अरमान से ज्यादा मेहरबान थी. उच्च शिक्षा से लौटकर उन्होंने हैदराबाद में डीजीसीए विंग एविएशन प्राईवेट लिमिटेड में एडमिशन लिया और कमर्शियल पायलट का प्रशिक्षण पूरा किया. इसके बाद उन्होंने दोहा जाकर टाइप रेटिंग का कोर्स भी किया.

अपने करियर के लिए कौकब अपने माता-पिता के योगदान को याद करते हुए कहती हैं कि उनके वालिद ने उन्हें बेटी से ज्यादा बेटा माना और जीवन में तरक्की के लिए हमेषा प्रोत्साहित किया. वे बताती हैं कि उन्होंने जो भी कहा और जो मांगा, वालिदेन ने उसकी पूर्ति की. आज उनकी जो भी उपलब्धियां हैं, वे वालिदेन के सहयोग-समर्थन के बिना संभव न थीं.

कौकब ने बताया कि उन्हें कमर्षियल पायलट बनने के लिए काफी मेहनत करने पड़ी. उन्होंने इसके लिए पांच राउंड की परीक्षाएं पास कीं. सीपीएल का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्होंने पहले महाराष्ट्र के गोविंदिया में ग्राउंड प्रशिक्षक के तौर पर सेवाएं दीं. अब उनका इंडिगो एयरलाइंस में चयन हो चुका है और वे इस समय नोएडा में सघन विभागीय प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं. कोरोनाकाल के कारण उसके इस प्रशिक्षण में दो साल की देरी हुई. उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण के बाद वे अगले महीने यात्री विमान को उड़ाएंगी.

साभार: आवाज़ द वॉइस

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