कश्मीरः 30 साल बाद मुस्लिमों के सहयोग से गणेश मंदिर में बजी घंटी

श्रीनगर. करीब 33 साल बाद हंदवाड़ा के राजदान मोहल्ला स्थित 100 साल से भी ज्यादा पुराने गणेश मंदिर में घंटी बजी. इसमें एक महत्वपूर्ण बात यह है कि मंदिर की मरम्मत से लेकर रंग-रोगन तक में स्थानीय मुसलमानों ने दिल और आत्मा से मदद की. इतना ही नहीं मरम्मत कार्य के लिए मजदूरों ने मजदूरी भी नहीं ली. कश्मीरी पंडितों ने मंदिर के पुनर्वास का बीड़ा उठाया, जिसे कश्मीरी मुसलमानों ने स्वीकार किया. तीन दशकों के बाद मंदिर में घंटी बजने के समारोह में हिंदू और मुस्लिम सभी मौजूद थे. कश्मीरी पंडित बहुत उत्साही और साथ ही मुसलमानों के आभारी थे. 1990 की तरह आज फिर से टिहरी (प्रसाद) का वितरण शुरू हुआ. इस मौके पर सिविल सोसायटी के सदस्य पंडितों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे.

उल्लेखनीय है कि सनातन धर्म सभा हंदवाड़ा ने राजदान मोहल्ला में गणेश मंदिर को 33 वर्ष बाद उसके पूर्व गौरव को बहाल किया और जीर्णोद्धार कर पुरानी क्षतिग्रस्त मूर्तियों को बदलकर नया शिवलिंग स्थापित किया. स्थानीय मुसलमानों ने समय-समय पर जीर्णोद्धार कार्यों में योगदान दिया. पंडितों ने बताया कि करीब 33 साल बाद मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया.

मंदिर की मरम्मत और सफाई के लिए स्थानीय लोगों ने भी पंडितों का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि यह एक बहुत पुराना मंदिर है, जो बहुत ही जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था और आज मुस्लिम समुदाय और हंदवाड़ा के पंडितों ने इस मंदिर की मरम्मत की है और इसे पेंट करके फिर से दिखाई दे रहा है.

सनातन धर्म सभा हंदवाड़ा के अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि मंदिर तीन दशक पहले क्षतिग्रस्त हो गया था और कड़ी मेहनत के बाद इसे बहाल कर दिया गया है. कुमार ने स्थानीय लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिन मुसलमानों ने इस मंदिर के जीर्णोद्धार का काम किया है. उन्होंने मजदूरी लेने से इनकार कर दिया और सारा काम मुफ्त में किया. जो इलाके में रहने वाले मुस्लिम समुदाय की एक बड़ी सौगात थी.

उन्होंने कहा कि 33 वर्षों के बाद पुरानी, क्षतिग्रस्त मूर्तियों को बदलने के बाद, नए शिव लिंगम का जीर्णोद्धार कर मंदिर को उसके पूर्व गौरव को बहाल किया गया. जोधपुर से नई मूर्तियां लाई गईं. एक सदी पुराने मंदिर के जीर्णोद्धार में इलाके के लोगों ने हमारी मदद की. स्थानीय लोगों के समर्थन के बिना इस मंदिर का जीर्णोद्धार आसान नहीं था. जम्मू से आना और यहां रेनोवेशन का काम खुद करना कभी भी आसान नहीं था.

कुमार ने आगे कहा कि स्थानीय मौलवियों सहित स्थानीय मुस्लिम भाई भी मंदिर जा रहे थे और इसके जीर्णोद्धार का सुझाव दे रहे थे. स्थानीय लोगों के अनुसार, ‘यह मंदिर लंबे समय तक यूं ही छोड़ दिया गया था. लेकिन अब यहां एक बार फिर से पूजा की जाएगी. हम खुश हैं, यह विश्वासों के बीच यह प्रक्रिया सामुदायिक संबंधों को मजबूत करेगी. हम उत्साहित हैं कि मंदिर का वातावरण फिर से सक्रिय हो जाएगा.

कुमार के मुताबिक, इस मंदिर के जीर्णोद्धार से पहले हमने यहां के स्थानीय लोगों से मुलाकात की और मंदिर के जीर्णोद्धार में उनकी मदद मांगी. समूह के सदस्य 100 साल पुराने मंदिर को बहाल करने में मदद करने पर सहमत हुए. जीर्णोद्धार प्रक्रिया के दौरान स्थानीय प्रशासन ने हमारी मदद की और जरूरत पड़ने पर हर तरह की मदद की. स्थानीय पुलिस से इस नवनिर्मित मंदिर के लिए पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का आग्रह किया. अध्यक्ष ने कहा कि पुलिस ने हमें पुलिस सुरक्षा के लिए अनुरोध भेजने को कहा है और हमें उम्मीद है कि जल्द ही उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात की जाएगी.

साभार: आवाज द वॉइस

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