भारत-बांग्लादेश संबंध और उन्हें मजबूत करने में नागरिक समाज की भूमिका

नई दिल्ली: इंडो-इस्लामिक हेरिटेज सेंटर द्वारा ‘भारत-बांग्लादेश सबंधों को मजबूत करने में नागरिक समाज की भूमिका’ पर एक अंतराष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया। जिससे भारत से प्रो.डॉ मुहम्मद सज्जाद आलम रिजवी और बांग्लादेश  से सूचना प्रौद्योगिकी और विज्ञान विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर मुहम्मद इकबाल हसन ने संबोधित किया।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर प्रकाश डालते हुए प्रोफेसर मुहम्मद इकबाल हसन कहा कि भारत और बांग्लादेश के संबंध आज और कल के नहीं हैं, बल्कि 1971 से हैं, ये संबंध हर स्तर पर हैं। उन्होंने आगे कहा कि सिविल सोसाइटी ने इसे मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उन्होंने आगे कहा कि सिविल सोसाइटी में केवल वे लोग ही नहीं आते। जिनक सबंध सरकार से हैं, बल्कि इसमें हर कोई शामिल है जो दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित कर सकता है।

दोनों देशों के बीच मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दे दशकों से चले आ रहे हैं, जैसे सीमा सुरक्षा और पानी का मुद्दा प्रमुख है। जबकि कुछ मुद्दे ऐसे है। जिनको पहले ही सुलझा लिया गया है, उदाहरण के लिए 2016 में सुलझाया गया सीमा मुद्दा।

वहीं प्रो.डॉ मुहम्मद सज्जाद आलम रिजवी ने भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों के वर्तमान परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध अच्छे हैं, लेकिन इसे और अधिक बनाने के लिए नागरिक समाज को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की जरूरत है, विशेष रूप से मीडिया क्षेत्र में। इस मामले में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस रिश्ते को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर काम किया जा सकता है। वेबिनार का सफल संचालन मुहम्मद जीशान अशरफी ने किया।

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