हुजूर सैयद उलेमा इमाम अहमद रजा को शाने रिसालत का सबसे बड़ा रक्षक मानते थे: मुहम्मद सईद नूरी

मुंबई: 15 जनवरी को हजरत सैयद उलेमा शाह सैयद अल मुस्तफा मरहरवी कुद्स का 49वां उर्स शरीफ मुंबई में आल इंडिया सुन्नी जमीयत उलेमा के मुख्यालय में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया। इस मौके पर आल इंडिया सुन्नी जमीयत उलेमा के अध्यक्ष सैयद मोइनुद्दीन अशरफ अशरफी अल जिलानी ने कहा कि हजरत सैयद उलेमा का शरीयत में उच्च स्थान था, वे उस समय के इमाम थे। आप हज़रत इमाम अहमद रज़ा फ़ाज़िल बरेलवी कुद्स सूरह के नक्शेकदम से जुड़े थे।

वहीं रज़ा एकेडमी के संस्थापक और प्रमुख, अलहाज मुहम्मद सईद नूरी ने कहा कि सैयद उलेमा हजरत सैयद अल-मुस्तफा कुद्स सूरह आल इंडिया सुन्नी जमीयत के संस्थापकों में से एक थे। वे प्रसिद्ध उलेमा और एक निडर वक्ता थे। वे जहां भी गए उन्होंने इस्लाम की सच्चाई का झंडा फहराया और दुनिया को यही संदेश देते रहे कि हम किसी की जय-विजय को क्यों करे, हमारे लिए काफी है सैय्यद अपना नारा या रसूलुल्लाह।

नूरी साहब ने कहा कि हजरत सैयद उलेमा के भारत में विशेष रूप से मुंबई पर बहुत एहसानात है। आज भी यहां के मुसलमान उनकी दया को नहीं भूल पाए हैं और इसे कभी नहीं भूलेंगे। इस मौके पर हजरत मौलाना फरीदुल ज़मान कादरी, हजरत सैयद मोइन मियां,  मौलाना खलील-उर-रहमान नूरी, कारी नियाज अहमद, कारी अब्दुल हक, मौलाना हाशिम रजा मिस्बाही, मौलाना अबरार अहमद अलीमी, कारी मुहम्मद साबिर, मुहम्मद आरिफ रिजवी और मुंबई के सुन्नी उलेमा और मस्जिदों के इमाम मौजूद रहे।

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