मोफिदुल इस्लाम के लिए वरदान बन गई कोरोना महामारी

मुकुट शर्मा / गुवाहाटी

हालांकि कोरोना की महामारी मानव समाज के लिए एक अभिशाप है, लेकिन कुछ लोगों ने इसे सकारात्मक रूप में लिया है और जीवन को नया रूप दिया है. ऐसे लोगों के लिए कोविड-19की महामारी वरदान बन गई है. इसका एक उदाहरण बारपेटा जिले के कलगछिया के एक कुशल विद्युत अभियंता मोफिदुल इस्लाम हैं.

ऐसे समय में जब हजारों युवा महामारी के कारण अपनी आजीविका खोने के लिए बेताब थे, मोफिदुल गाँव के खेत को अपने कार्यक्षेत्र के रूप में चुनकर आत्मनिर्भर बन गए. यह उच्च शिक्षित युवा, जिसने कृषि में जीविकोपार्जन का मार्ग प्रशस्त करने में संकोच नहीं किया, अब नौकरी चाहने वाले लाखों युवाओं के लिए एक आदर्श बन गया है.

अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद, मोफिदुल दूरसंचार क्षेत्र में शामिल हो गए. जब सब ठीक हो गया, तो उच्च शिक्षित युवा महामारी के कारण अपनी नौकरी छोड़ने को मजबूर हो गया. यद्यपि नौकरी उपलब्ध थी, लेकिन मोफिदुल ने हार नहीं मानी और नर्सरी और अन्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया.

मोफिदुल पारंपरिक खेती के बजाय स्ट्रॉबेरी की खेती करने लगे. उन्होंने मुंबई, पुणे और अन्य जगहों से स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की. वे अब एक एकड़ जमीन से 3-4लाख रुपये से अधिक कमा रहे हैं. स्ट्रॉबेरी की खेती कर आत्मनिर्भरता के प्रतीक बन चुके कलगछिया के इंजीनियर मोफिदुल इस्लाम अब सबके लिए रोल मॉडल बन गए हैं.

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उन्होंने बताया, ‘‘अपनी डिग्री पूरी करने के बाद, मैं दूरसंचार क्षेत्र में एक निजी कंपनी के लिए काम कर रहा था. जब मैं इस बारे में सोच रहा था, तो मुझे एक दोस्त के घर पर स्ट्रॉबेरी का एक गुच्छा मिला. वहीं से कुछ करने की ठानी’’

यह देखते हुए कि असमिया की नई पीढ़ी काम के पीछे भागने के बजाय खेती या अन्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके आत्मनिर्भर बन सकती है, मोफिदुल ने कहा कि वह हमेशा कुछ नया करके नई पीढ़ी को कमाने का रास्ता दिखाना चाहते थे.

इस संदर्भ में वे कहते हैं, ‘‘मैं हमेशा से नए और अनोखे विचारों के साथ काम करना चाहता था. मैं खेती में सफल होकर नई पीढ़ी के लिए कुछ नया करना चाहता था. हमारी युवा पीढ़ी अगर सीखने में रुचि रखती है, तो विभिन्न क्षेत्रों में सफल हो सकती है. पारंपरिक खेती से जुड़े किसानों को भी नई तकनीक और तरीके सीखने चाहिए.’’

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मोफिदुल ने एक खेत मजदूर के रूप में अपनी नौकरी छोड़ दी है. उन्होंने कहा है कि वह उन युवाओं की मदद करना चाहेंगे, जो स्ट्रॉबेरी की खेती के बारे में अधिक जानना चाहते हैं. उनका कहना है कि वह उन सभी की मदद के लिए तैयार हैं, जो खेती करके आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं. ऐसे में युवा पीढ़ी को आगे आना होगा. हमारी युवा पीढ़ी सिर्फ ऑफिस के लिए दौड़कर किसी न किसी समय डिप्रेशन का शिकार होने वाली है.

बारपेटा में नर्सरी व्यवसाय शुरू करने वाले मोफिदुल को भविष्य में ड्रैगन फार्मिंग की लालसा है. इसके लिए उन्होंने ड्रैगन फार्मिंग का अध्ययन शुरू कर दिया है और विभिन्न योजनाओं पर काम कर रहे हैं. उद्यमी युवक ने जानकारी दी है कि स्ट्रॉबेरी की खेती का मौसम खत्म होते ही वह ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर देंगे.

साभार: आवाज द वॉइस

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