फीफा वर्ल्ड कप में बिहार की शरीन अहमद अरबी भाषा में गाएगी गीत

मोहम्मद अकरम/बोधगया (बिहार )

”मेरे गीत को सुन कर बिहार के बड़े-बड़े नेता खुश हुए और आर्थिक मदद, मोबाइल वगैरह देने की बात की. लेकिन महीने गुजर गए मगर अब तक भरोसा के अलावा कुछ नहीं मिला है. लेकिन बहुत खुश हूं कि जल्द ही मेरी अरबी गीत को पूरी दुनिया सुनेगी. इस के लिए मैं दिन रात मेहनत कर रही हूं.”

ये शब्द हैं बिहार के बोधगया जिले की रहने वाली शरीन अहमद की.

नवम्बर माह में कतर में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप में बिहार के गया जिले के बोधगया की रहने वाली शरीन अहमद को मिस्र से अरबी गाना गाने की पेशकश की गई है जो फीफा विश्वकप पर आधारित होगा. इसका ऑफर इन्हें मजेन अल बाहिर ने दिया है.

शरीन अहमद को कई राज्य सम्मानित कर चुके हैं.

कौन हैं शरीन अहमद?

बिहार के बोधगया जिले के बेलाभलावा गांव के रहने वाले मोहम्मद शकील अहमद की 16 वर्षीय पुत्री हैं. शकील, प्राइवेट नौकरी कर घर चलाते हैं. मां शायना अहमद गृहिणी हैं. शरीन अहमद इस समय इंटर (बारहवीं) में पढ़ाई कर रही हैं. वह अकेली बहन हैं और तीन भाई हैं. उनकी शुरुआती शिक्षा बोधगया के ज्ञान भारती पब्लिक स्कूल में हुई. यहां से मैट्रिक का परीक्षा पास करने के बाद अल मोमिन कालेज में पढ़ रही हैं.

नंदिता लिखती हैं तो शरीन गाती हैं

शरीना कहती हैं कि शुरू में मैं गूगल से अंग्रेजी गाने लेकर पढ़ती थी. एक रोज सोशल मीडिया पर बैंगलोर की रहने वाली नंदिता से बात हुई. जिसके बाद वह हमारे लिए गीत लिखती हैं और हम उसे गाते हैं.

लॉकडाउन में ऑनलाइन सीखा मौसिकी का फन

शरीन बताती हैं कि जब लॉकडाउन लगा था तो उस समय सोशल मीडिया के जरिए अंग्रेजी, अरबी, तुर्की, स्पेनिश, चाइनीज, जापानी और कोरियाई गाना गाने की कला सीख ली. शुरुआत में परेशानी आई लेकिन सीखते-सीखते सीख गई हू. जब मैं गाना शुरू करती हूं तो लोग हैरत में पड़ जाते थे. इसके बाद हमने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. हमेशा घर वालों का समर्थन रहा है.

इटली और नीदरलैंड से मिल चुका है आफर

एक सामान्य परिवार से आने वाली शरीना अहमद का सोशल मीडिया पर वीडियो देख कर इटली और नीदरलैंड म्युजिक कम्पनियों के अलावा कई देशों से गाने के ऑफर आ चुके हैं.कुछ कम्पनियां उनके घर तक पहुंची. लेकिन वक्त पर पासपोर्ट नहीं होने के कारण विदेश का दौरा नहीं कर पाई हैं. अब सब कुछ तैयार है और उन्हें उम्मीद है कि फीफा कप के लिए गीत गाने के बाद ज्यादा ऑफर आएंगे.

नेताओं ने मदद की बात की लेकिन कुछ नहीं दिया

शरीन अपनी नाराजगी का इजहार करते हुए कहती हैं, “मैंने बिहार के कई नेताओं से मदद की गुहार लगाई लेकिन अब तक किसी ने कुछ नहीं किया हैं. कुछ नेताओं ने आश्वासन देकर कुछ देर के लिए हौसले को पस्त कर दिया मगर इससे हमें और ताकत मिलती हैं कि एक रोज यहीं लोग हमारे साथ आएंगे.”

सपना क्या है?

शिरीन कहती हैं,“मैं चाहती हूं कि मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करूं. इसके लिए जरूरी है केन्द्र सरकार हमारी मदद करे.”

साभार: आवाज़ द वॉइस 

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