बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड बांट रहा गरीबों में रमजान और ईद की खुशियां

सेराज अनवर /पटना

तीस दिनों के रोजे के बाद ईद मनाई जाती है.ईद खुशी का त्योहार है.मगर गुरबत में बहुत लोग खुुशी से महरूम रह जाते हैं. इस बीच बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड झुग्गी-झोंपड़ी,गरीब मुहल्ला में रमजान और ईद किट लेकर पहुंच रहा है ताकि गरीब रोजेदारों का रोजा आराम से गुजरे और ईद खुुशी से कोई वंचित न रह जाए. हालांकि बिहार जैसे पिछड़े राज्य में 5000 किट बहुत कम है.

बोर्ड इस साल पांच हजार लोगों के बीच रमजान और ईद किट का वितरण कर रहा है.इसका आगाज शनिवार हो गया.पहले दिन बोर्ड के बीस से पचीस स्टाफ इस नेक काम में लगे.बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद इरशादुल्लाह खुद पटना जिले के बाढ़ में 200 निर्धनों के बीच किट बांट कर आए.

पटना शहर में मुख्य कार्यपालक अधिकारी खुुर्शीद अनवर सिद्दीकी की निगरानी में सब्जीबाग,फुलवारीशरीफ,खानकाह मुजीबिया आदि इलाकांे में किट वितरण का काम किया गया.बोर्ड द्वका यह किट गरीबों के लिए एक राहत का राहत पैकेज है.

दस किलो का रमजान और ईद किट एक बैग में तैयार किया गया है.जिसमें एक किलो लच्छा-सेवई,एक किलो चूड़ा,तीन किलो चावल,आधा किलो दाल,आधा किलो चीनी,एक बोतल सरसों तेल,आधा किलो चना,आधा किलो बिस्किट आदि शामिल है.एक किट की लागत आठ 800 रुपए बताया गया है.

गरीब घरों में खुुशियां बिखेरने केलिए बोर्ड बीस से पचीस लाख रुपए खर्च करने जा रहा है.पांच हजार लोगों तक किट का वितरण को आसान बनाने के लिए बोर्ड ने शनिवार और रविवार को कार्यालय बंदी के दिन अपने सभी स्टाफ को लगाया है.बजाबता गाड़ी से मुहल्ला-मुहल्ला घूम कर जरूरतमंदों के बीच किट बांटे जा रहे हैं.

2009 में मोहम्मद इरशादुल्लाह ने रखी नींव

वक्फ बोर्ड की प्राथमिकता वक्फ सम्पति का बेहतर प्रबंधन करना है. इसके अलावा बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड कल्याणकारी कार्यों को भी अंजाम देता है.बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद इरशादुल्लाह आवाज द वायस से कहते हैं कि बोर्ड का काम सिर्फ वक्फ से ही जुड़ा हुआ नहीं है.

हम कल्याणकारी कार्य भी करते हैं.बोर्ड की जब आमदनी है तो कल्याणकारी कार्यों में खर्च करने से परहेज क्या करना ?वह बताते हैं कि बिना शोर शराबा के 2009 में हमने इस काम को शुरू किया.कितने गरीब हैं जो गुरबत की वजह से रमजान भी मुफलिसी में गुजारते हैं.

उनकी ईद भी ठीक से नहीं मनती.ऐसे ही जरूरतमंदों के बीच रमजान और ईद किट पहुंचाने की योजना बनाई गई है.हमारे स्टाफ,सीईओ और मैं खुद इसमें लगा हूं कि जल्द से जल्द यह किट सभी लोगों के पास पहुंच जाए. हालांकि वह मानते हैं कि सूबे में निर्धनों की आबादी के हिसाब से पांच हजार किट कम है.

मोहम्मद इरशादुल्लाह 2005 से बोर्ड के चेयरमैन पद पर हैं.उनके नेतृत्व में बोर्ड ने काफी तरक्की की है.हाल में बोर्ड ने दो एम्बुलेंस खरीदा है.एक एम्बुलेंस की कीमत दस लाख के करीब बताई गई.

यह बहुत कम किराए पर उपलब्ध होगी, ताकि एम्बुलेंस का मेंटेनेंस और ड्राइवर का खर्च निकल सके. एक एम्बुलेंस इमारत ए शरिया और एक नवनिर्मित अंजुमन इस्लामिया हॉल में तयनात किया जाएगा.

मोहम्मद इरशादुल्लाह कहते हैं कि जरूरत पड़ने पर एक दो एम्बुलेंस की और खरीद हो सकती है.कोरोना काल में एम्बुलेंस की दिक्कत को देखते हुए बोर्ड ने एम्बुलेंस खरीदने का फैसला लिया.इसके अलावा बोर्ड यतीम बच्चियों को 25 हजार रुपए की मदद करता है.

बोर्ड अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को वोकेशनल कोर्स का प्रशिक्षण भी कराता है.प्रशिक्षण में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों का साक्षात्कार 26 अप्रैल को है.

साभार: आवाज द वॉइस

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