‘अन्ना हज़ारे की तर्ज पर सुशांत सिंह का हो रहा इस्तेमाल, पहले केजरीवाल थे अब कंगना’

शीतल पी सिंह

यूपीए 2 के समय में देश में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ बड़ा आंदोलन चला था जिसके बारे में आज प्रशांत भूषण ने राजदीप सरदेसाई को दिये गये इंटरव्यू में स्वीकार किया कि वह आरएसएस की शह पर चला था ।

वह आंदोलन “लोकपाल”की माँग कर रहा था! सारे टीवी चैनलों पर वही आंदोलन दिखाया जाता था और सारे अख़बारों में वही आंदोलन छपता था । देश का हर इंसान (जिसका मन मस्तिष्क हरकत करता था ) वहीं धड़क रहा था !

आंदोलन ने कांग्रेस की सरकार को जनता की नज़र में तहस नहस कर दिया । टूजी वग़ैरह में लाखों करोड़ के घोटाले बयान हुए थे । अब वे लाखों करोड़ कहाँ हैं किसी को नहीं मिले बल्कि कोर्ट में साबित हुआ कि सारे अनुमान झूठ पर आधारित थे । साधारण चीजों को हवा भरकर असाधारण कर दिया गया था । ”अन्ना हज़ारे” भी एक ऐसे ही ग़ुब्बारे थे जिसकी हवा धीमे धीमे निकाल ली गई और वह फूटे हुए ग़ुब्बारे के फटे हुए रबड़ के चिथड़े की तरह वहीं पहुँचा दिये गये जहां से उठाए गए थे ।

बस केजरीवाल चालाक निकले , एक म्युनिसिपैलिटी के कुछ बड़े आकार की दिल्ली सरकार छीनने में कामयाब रहे , बाक़ी पूरा देश आरएसएस ने हथियाया और “फ़क़ीर साहेब” महानायक बन गये !

अब महाराष्ट्र की सरकार को सबक़ सिखाने और बिहार में राज्य विधानसभा का चुनाव जीतने के लिये उसी टोली ने सुशांत सिंह राजपूत की लाश का इस्तेमाल किया है । हज़ारों सोशल मीडिया पेज सारे टीवी चैनल और अख़बार सुशांत सिंह को न्याय दिलाने निकल पड़े हैं । कई आत्महत्याओं को टूजी की तरह हत्याओं की पूरी तरह मनगढ़न्त कहानियों में बार बार दोहराकर लाखों लोगों को यक़ीन दिला दिया गया है कि सचमुच सुशांत सिंह और उनके लिये काम लाने वाली दिशा सालियान की हत्या हुई है । हड़बड़ाए सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार की प्रायोजित जाँच पर मुहर लगा दी है, तीन तीन केंद्रीय एजेंसियों को टीवी चैनलों द्वारा गढ़ी गई एक कांसपिरेसी थ्योरी को सच साबित करने में लगा दिया गया है और एक रिटायर्ड फ़ौजी परिवार को विलेन बनाकर बलि चढ़ा दिया गया है ।

चूँकि मामला पूरी तरह से झूठ था इसलिये उसमें डायवरजन के कई रास्ते छोड़ रक्खे गये थे और उन्हीं में से एक ड्रग्स के रास्ते पर अब उसको दौड़ा दिया गया है पर लोग बिलबिला न उठें इसलिये संयोग से हाथ आ गईं कंगना रानावत को मैदान में उछाल दिया गया है । सुशांत सिंह राजपूत की हत्या की जाँच पीछे और कंगना रानावत की जंग आगे । कोई न्यूज़ चैनल खोल लीजिए कंगना पर ही बहस करता, रिपोर्ट करता, लड़ाई करता ही मिलेगा । कंगना अब लद्दाख, जीडीपी, बेरोज़गारी और कोरोना सबको निपटाने में सक्षम हैं । सुशांत के लिए न्याय माँगते सोशल मीडिया ग्रुप्स अब कंगना के लिये न्याय माँग रहे हैं । फालोवर्स को पता ही न चला कि कब वे सुशांत सिंह की जगह कंगना पर शिफ़्ट कर दिये गये । ठीक वैसे ही जैसे 2013-14 में कब एकाएक अन्ना हज़ारे की जगह “फ़क़ीर हमारे” पर शिफ़्ट कर दिये गये थे !

कहा जाता है कि एक बार धोखाधड़ी का शिकार होना सामान्य बात है कोई भी धोखा खा सकता है लेकिन बार बार लगातार धोखा खाने वाले को क्या कहते हैं…?

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