2025 में आरएसएस के सौ बरस होंगे पूरे, भारत बन जाएगा हिन्दू राष्ट्र?

शीतल पी सिंह

2025 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ बरस पूरे हो चुके होंगे और उसकी दूसरी सदी शुरू हो चुकी होगी । संभवत अगले एक दो साल में ही कांग्रेस की सारी राज्य सरकारें वे छीन चुके होंगे । ममता बनर्जी भी कठिन विकेट पर जा पहुँची हैं । बिहार और यूपी के सामाजिक न्याय के दलों के आधे इधर आधे उधर और बाक़ी ईडी इनकम टैक्स और सीबीआई के हवाले हैं तो कोई चिंता करने की ज़रूरत नहीं है । तेलंगाना और आंध्र के सत्तारूढ़ दल दिल्ली की सल्तनत के आगे नत हैं ही । तमिलनाडु में जयललिता की पार्टी को लगभग एनडीए में निगला जा चुका है । केरल में अपवाद चल सकता है और पंजाब में चुनाव के ज़रिये ही फेरबदल हो लेगा । विरोध के नाम पर “केजरीवाल क़िस्म”को फ़िलहाल जीवित रहने दिया जायेगा जो खुद को “अग्रवाल, बनिये” कहते हैं हनुमान चालीसा पढ़ते हैं,दंगे पर ख़ामोश रहते हैं और राहुल गांधी से सवाल करते हैं ।

देश के शिक्षाजगत में आमूल चूल बदलाव आ चुकेगा । मनुस्मृति के अंश पुराणों में वर्णित कथायें और रामायण महाभारत के प्रसंग स्कूली पाठ्यक्रम में बड़ी जगह घेर लेंगे और आधुनिक नागरिक क़ानून क़ायदे से संबंधित सामग्री वापस ली जा चुकी होगी । समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी होगी । दूसरे धर्मों के शैक्षणिक संस्थानों की अंतिम साँसें चल रही होंगी या वे पाठ्यक्रम आदि में समझौते करके ज़िंदा होंगे ।

इस बीच चीन के दबाव में सूरत ऐसी बनती जा रही है कि किसी भी दिन मन की बात बाहर आ जायेगी कि अंग्रेज़ बहादुर के चचाजात अमरीका बहादुर की फ़ौजी छावनी फिर से हिंदू राष्ट्र की सीमाओं में गोरी फ़ौज के चरण पखरवाने आ चुकी है । साउथ चाइना सी में टक्कर देने के लिये जापान कोरिया की तर्ज़ पर भारत में भी गोरी फ़ौज को लाव लश्कर सहित स्थापित करने के सारे तर्क देशभक्त टीवी चैनलों और भांट मीडिया द्वारा बहुमत के गले के नीचे उतार दिया जायेगा!

चूँकि चीन से संबंधित तनाव का तनाव खोपड़ी में बजता रहेगा इसलिए हिंदू राष्ट्र में महंगाई बेरोज़गारी आर्थिक तबाही मोनोपली अराजकता और अनवरत जारी रक्खी गई प्रायोजित हिंसा की आलोचना देशद्रोह के तहत दर्ज होती रहेगी । ईमानदार और प्रतिबद्ध इंटेलेक्चुअल्स जेलों में मर खप जायेंगे या सड़ रहे होंगे। आलोचक पत्रकारों पर देश की विभिन्न अदालतों में मसखरी चलती देख नई पौध की हिम्मत ही न होगी कि वे अमिष देवगन को आदर्श न मानें ।

पूरे देश में पुलिस द्वारा अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया जाना अदालतों में भी किसी क़िस्म की जुम्बिश पैदा नहीं करेगा । विभिन्न राज्यों में मुठभेड़ के आँकड़ों की प्रतियोगिता चलेंगी और ऐसे पुलिस वाले प्रमोशन पायेंगे जो ज़्यादा मुठभेड़ किया करेंगे । राज्यों में सिंघम सम्मान दिये जायेंगे ।

चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया समेत सुप्रीम कोर्ट के ज़्यादातर जजेज “फ़क़ीर” की सार्वजनिक मंचों पर खुली प्रशंसा में प्रतियोगिता चलायेंगे । हाई कोर्ट के जजेज सिर्फ़ संघ अप्रूव्ड ही लिये जा सकेंगे ।

जेलों की कैपेसिटी काफ़ी बढ़ चुकी होगी पर फिर भी उनमें बम्पर भीड़ होगी । अंतरराष्ट्रीय प्रेस के प्रतिनिधियों की वीसा अवधि जो पहले ही सिकोड़ कर एक बार में सिर्फ़ छः महीने कर दी गई है और घटा दी जायेगी । देश की सारी सरकारी कंपनियाँ बिक चुकी होंगी या नीलामी के लिये बाज़ार में होंगी ।

कम से कम तीस फ़ीसदी अतिरिक्त किसान आने वाले वर्षों में खेत बेचकर 2025 तक मज़दूरों में बदल चुके होंगे और कल कारख़ानों में मज़दूर क़ानून ऐसे होंगे कि सामंतशाही भी शर्मा जाय । हायर एंड फ़ायर मूल मंत्र होगा ।

मुकेश अंबानी दुनियाँ के सबसे रईस व्यक्ति घोषित हो चुके होंगे और गौतम अड़ानी भी दुनिया के टॉप टेन तक पहुँच चुके होंगे । ग़रीबी का इंडेक्स बता रहा होगा कि सारी दुनियाँ में कुल जितने गरीब गिने गये हैं उससे ज़्यादा तो सिर्फ़ भारत में ही हैं !

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