PCOS यानी भारत में दस में से एक महिला इसका शिकार:- डॉ फरहीन सिद्दीकी

इस मॉडर्न और भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं न वक़्त पर खाती हैं, ना सोती हैं और न ही खुद की सेहत का ख्याल रख पाती हैं।कई बार शरीर को अनदेखा करने से विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा होती है जिनमें से एक है PCOD/PCOS पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को आम भाषा में (PCOS) कहते हैं।

आइए जानते है इस बीमारी के बारे में बलरामपुर हॉस्पिटल लखनऊ में इंटर्न डॉ फरहीन सिद्दीकी से । डॉ फरहीन सिद्दीकी जी बताती है कि इसे पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर (PCOD) भी कहा जाता है। पिछले कुछ सालों में ये समस्या महिलाओं में तेजी से बढ़ी है। PCOD महिलाओं में इनफर्टिलिटी के मुख्य कारणों में से एक है। दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में किए गए अध्ययन, पीसीओएस की व्यापकता (रॉटरडैम के मानदंड के अनुसार) क्रमशः 9.13% और 22.5% (एंड्रोजन अतिरिक्त सोसायटी मानदंड द्वारा 10.7% ) बताई जाती है।

पीसीओएस को पहली बार 1935 में स्टीन और लेवेंथल द्वारा रिपोर्ट किया गया था, इस समस्या से पीड़ित महिलाओं में और भी अनेक बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। यह रोग महिलाओं एवं लड़कियों में होना आजकल आम बात हो गई है। कुछ सालों पहले तक यह समस्या 30-35 उम्र की महिलाओं में अधिक पाई जाती थी पर अब स्कूल जा रही बच्चियों में भी यह समस्या आम हो गई है। आपको बता दें कि जिन लड़कियों में पीरियड्स की समस्या देखने मिलती है उन्हीं लड़कियों को पॉली सिस्टिक ओवेरियन डिजीज (PCOD) की समस्या का सामना करना पड़ता है। अगर कम उम्र के चलते ही इस समस्या का पता लग जाए तो इसे काबू में किया जा सकता है।

क्या है PCOD/PCOS?

PCOD/PCOS यानि ‘पॉली सिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर’ या ‘पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम’। PCOS एक गंभीर हार्मोनल समस्या है जिसकी वजह मेटाबॉलिक और प्रजनन संबंधी समस्या आती है। इसमें महिला के गर्भाशय में मेल हार्मोन androgen का स्तर बढ़ जाता है जिसके वजह से ओवरी में सिस्ट्स बनने लगते हैं। यह आश्चर्य की बात है की इस बीमारी के होने का आजतक कोई कारण पता नहीं चला है और यह अभी भी शोध का विषय है, परंतु चिकित्सकों का मानना है कि यह समस्या महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, मोटापा या तनाव के कारण उत्पन्न होती हैं। साथ ही यह जैनेटिकली भी होती है। शरीर में अधिक चर्बी होने की वजह से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ने लगती है,जिससे ओवरी में सिस्ट बनता है। वर्तमान में देखें तो हर दस में से एक प्रसव उम्र की महिला इसका शिकार हो रही हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जो महिलाएं तनाव भरा जीवन व्यतीत करती हैं उनमें पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम होने की संभावना अधिक होती है।

होने के कारण

डॉ सिद्दीकी बताती है कि 5 से 10% महिलायें 15 और 44 वर्ष के बीच, या उन वर्षों के दौरान जब उनको बच्चे हो सकते हैं, PCOD से पीड़ित हो जाती हैं। अधिकांश महिलाओं को उनके 20 और 30 की आयु में पता चलता है कि उनको पीसीओडी (PCOD in Hindi) है, जब उन्हें गर्भवती होने में किसी प्रकार की समस्या आती है और वे डॉक्टर को दिखाती है। लेकिन पीसीओएस आपके यौवन के बाद किसी भी उम्र में हो सकता है । PCOD सभी जातियों और नस्लों की महिलाओं को हो सकता है। वैसे तो PCOD होने के सही कारणों का पता लगाना असंभव है लेकिन अध्ययन केअनुसार कुछ कारक जैसे आनुवंशिकी मुख्य भूमिका निभाते हैं:

  • इंसुलिन की बढ़ी हुई मात्रा: मानव शरीर में अधिक इंसुलिन के परिणामस्वरूप अधिक एण्ड्रोजन का उत्पादन होता है। यह एक हार्मोनल असंतुलन का कारण बनता है और महिलाओं में बांझपन का कारण बनता है।
  • जीन: कुछ चिकित्सा पेशेवरों का मानना है कि पीसीओडी (PCOD )महिलाओं को उनके परिवार से मिलता है।
  • लोवर एब्डोमेन की सूजन: शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाएं पर्याप्त पदार्थों का उत्पादन करने में असमर्थ होती हैं जो संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। जिन महिलाओं में लोवर एब्डोमेन की सूजन (निम्न-श्रेणी) होती है, उनमें एंड्रोजन के उत्पादन की संख्या अधिक होती है।

निम्न संकेतों से पहचाना जा सकता है पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम को :

1. वक़्त पर मासिक धर्म का न आना- छोटी उम्र में ही अनियमित पीरियड्स आना इसका सबसे बड़ा संकेत होता है।
2. अचानक वजन बढ़ना
3. अधिक बाल उगना (Hirsutism)- ठोड़ी पर अनचाहे बाल उगना सिर्फ हार्मोनल चेंज ही नहीं इस बीमारी का लक्षण भी हो सकता है
4. भावनात्मक उथल-पुथल- जल्दी किसी बात पर इमोशनल, अधिक चिंतित रहना, बेवजह चिड़चिड़ापन
5. बांझपन- इस समस्या से बांझपन अधिक देखने को मिलता है,
6. चेहरे पर मुहांसों का होना-ओवरी में सिस्ट चेहरे ,गर्दन, बांह, छाती, जांघों आदि जगहों पर धब्बे पर दाग धब्बे,तेलीय चेहरा या डैन्ड्रफ भी दे सकता है।

PCOD/PCOS से कैसे पाये निजात

  • सही लाइफस्टाइल का चयन करें :

PCOD/PCOS से छुटकारा पाने के लिए लाइफस्टाइल बदलना बहुत ज़रूरी है। बहुत सी महिलाएं इसे नज़र अंदाज़ कर देती हैं क्योंकि उन्हें इस बीमारी के बारे में पता ही नहीं होता है। इस कारण वे अपनी बच्चियों में यह लक्षण पहचान नहीं पाती जिससे आगे उन्हें गर्भधारण में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा मॉडर्न जनरेशन की लेट नाइट पार्टीज जिसमें बच्चे स्मोक, शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं, यह उनकी सेहत के लिए अच्छा नहीं होता। मॉडर्न जनरेशन के अलावा महिलाएं भी अपनी किटी पार्टीज और पब पार्टीज में इसका सेवन कर रहीं हैं।

  • अच्छा खानपान, अच्छी सेहत :
    अपनी डाइट में फल,हरी सब्जियां,विटामिन बी युक्त आहार,खाने में ओमेगा 3 फेटी एसिड्स से भरपूर चीज़ें शामिल करें जैसे अलसी, फिश, अखरोट आदि। आप अपनी डाइट में नट्स, बीज, दही, ताज़े फल व सब्जियां ज़रूर शामिल करें। दिन भर भरपूर पानी पीएं।
  • नियमित व्यायाम करें :
    पैदल घूमना, जॉगिंग, योग, एरोबिक्स,साइक्लिंग, स्विमिंग किसी भी तरह का शारीरिक व्यायाम रोज़ करें। प्राकृतिक जगहों पर सैर करने जाएं जिससे केवल आपका तनाव ही दूर नहीं होगा बल्कि वजन भी कम होगा जिससे मासिक धर्म सही समय पर आ सकते हैं। व्यायाम आपके शरीर को स्वस्थ रखने के साथ तनाव मुक्त भी करता है। अपना कुछ वक़्त आप अकेले प्रकृति के साथ बिताएं जिससे आप का मन शांत रहे।

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