बड़ा भाई पहले ही आईपीएस अब छोटा भाई बनेगा आईएएस अधिकारी

मोहम्मद अकरम/ बीदर (कर्नाटक)

घर में यदि पढ़ाई का माहौल हो तो बच्चे अपने आप उसी दिशा में बढ़ जाते हैं. ठीक इसी तरह छोटे भाई ने जब बड़े भाई को आईपीएस की वर्दी में देखा तो उसने भी यूपीएससी में कामयाबी हासिल कर आईएएस बनने की ठानी. नतीजा सबके सामने है. तीन दिन पहले आए यूपीएससी के रिजल्ट में एक नाम कर्नाटक के बीदर जिले के मोहम्मद हारिस सुमैर का भी है.

मोहम्मद हारिस सुमैर ने यूपीएससी में 270वां रैंक हासिल किया है. आवाज द वॉयस से बात करते हुए सुमैर कहते हैं, ‘‘ख्वाब और प्रयास पूरे हो गए. बचपन से वह और उनके बड़े भाई बड़े होकर अफसर बनने का सपना देख रहे थे.’’

सुमैर बताते हैं, ‘‘दोनों भाइयों की शुरुआती शिक्षा घर पर हुई. हाइस्कूल केंद्रीय विद्यालय बीदर से पास किया. इसके बाद इंटर हैदराबाद और रामिया कॅालेज बेंगलुरू से कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की. 6 महीने नौकरी भी की.”बड़े भाई मोहम्मद नदीमुद्दीन के यूपीएससी क्लीयर करने के बाद तो जैसे उनके जोश में जबर्दस्त उबाल आ गया. इनके बड़े भाई अभी हैदराबाद में ट्रेनिंग कर रहे हैं.

मोहम्मद हारिस सुमैर बताते हैं कि बड़े भाई के यूपीएससी में चयन के बाद विश्वास हो गया कि उन्होंने बचपन में अफसर बनने का जो सपना देखा था वह जरूर पूरा होगा. बीच-बीच में बड़े भाई हौसला बढ़ाते रहते हैं.

उन्होंने बताया कि सीविल सर्विसेज की परीक्षा की तैयारी  के लिए नौकरी छोड़ कर दिल्ली चले गए थे. कड़ी मेहनत की. पहली कोशिश में कामयाबी नहीं मिली. बावजूद इसके तैयारियां जारी रही. दूसरे प्रयास में वह सफल हो गए.

आवाज द वॉयस से बातचीत में हारिस सुहैर बचपन का एक दिलचस्प किस्सा सुनाते हैं. कहते हैं, ‘‘जब मैं छोटा था, तभी उनके जिले में नए कलेक्टर हर्ष गुप्ता पदस्थापित हुए. उनके प्रयासों से बीदर जिले का नक्शा बदल गया. यह देखकर दोनों भाईयों ने अधिकारी बनने का फैसला किया.”वह कहते हैं,“अब समय आ गया है अपने देश, समाज और इलाके की सेवा करने का.”

उन्होंने बताया, ‘‘एक आईपीएस हारिस बिन जमान जामिया मिल्लिया आए थे. उनसे मुलाकात होने पर उन्होंने भी यूपीएससी करने की प्रेरणा दी. उन्हें जब मेरे यूपीएससी में कामयाबी का पता चला तो वो बहुत खुश हुए. फोन कर मुबारकबाद दी.”अपने बड़े भाई के प्रयासों को याद करते हुए वह कहते हैं उन्होंने हर मोड़ मेरी भरपूर रहनुमाई की.

मोहम्मद हारिस सुमैर केअब्बा डिप्लोमा कॉलेज में लेक्चरर थे. अब रिटायर हो चुके हैं. अम्मी गृहणी हैं. चार भाई बहनों में सबसे छोटे हारिस मुस्लिम नौजवानों के बारे में कहते हैं ‘‘मैं उनसे कहना चाहता हूं कि कोई बहाना बना कर अपने आप को पीछे न रखे. जो मेहनत करेगा वही कामयाब बनेगा. आप अपने आपको सिर्फ मेडिकल, इंजीनियरिंग तक सीमित न रखें. अपने बचपन के ख्वाबों को पूरा करें. सपने देखें और पूरा कीजिए. सपने पूरे करने को दिन रात मेहनत कीजिए. कामयाबी मिलेगी ही मिलेगी.”

अपनी तैयारियों के बारे में उन्होंने बताया कि नेट का सहारा लिया. कभी-कभी राज्यसभा टीवी के डिबेट भी देखता था. इससे नोट्स तैयार करने में मदद मिलती थी.

Source: Awaz The Voice

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here