कश्मीरी बुद्धिजीवी बोले, निर्दोषों की हत्या कश्मीरियत को बदनाम करने की साजिश

रिजवान शफी वानी/ श्रीनगर

कश्मीर घाटी में हाल ही में हुई हत्याओं ने अल्पसंख्यकों और गैर-स्थानीय श्रमिकों- कारीगरों में भय और आतंक फैला दिया है. जहां राजनेताओं का मानना है कि अल्पसंख्यकों में डर पैदा करने की कोशिश की जा रही है, वहीं स्थानीय कश्मीरियों के साथ सामाजिक और धार्मिक नेता इन ‘लक्षित हत्याओं‘ से दुखी हैं.

कश्मीर घाटी में पिछले एक महीने में अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा अब तक बारह नागरिकों की हत्या की गई है, जिनमें अल्पसंख्यक समुदायों के दो शिक्षक, एक प्रसिद्ध ड्रग डीलर और पांच गैर-स्थानीय मजदूर शामिल हैं.

घाटी के प्रमुख विद्वानों ने अल्पसंख्यकों और गैर-मूल निवासियों की हत्याओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इसने कश्मीर के सदियों पुराने भाईचारे और धार्मिक सहिष्णुता को चोट पहुंचाई है. जम्मू-कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती मुफ्ती नसीरुल इस्लाम का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों की हत्या स्थानीय मुसलमानों को बदनाम करने की साजिश है.

उन्होंने आवाज द वाॅयस से कहा, ‘‘मैं कश्मीर में हो रही हत्याओं के खिलाफ हूं. इस्लाम किसी भी हाल में हत्या की इजाजत नहीं देता. मैं मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं.

ग्रैंड मुफ्ती ने कहा कि कुछ लोग हत्याओं के लिए कश्मीरियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जो पूरी तरह से गलत है. ‘‘इन हत्याओं के लिए किसी भी समुदाय को दोष देना गलत है. इन लक्षित हत्याओं का कश्मीरियों से कोई लेना-देना नहीं है.‘‘

मुफ्ती नसीरुल इस्लाम ने राज्यपाल प्रशासन और भारत सरकार से हत्याओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करने की अपील की ताकि यह पता लगाया जा सके कि साजिशों के पीछे कौन था.

उन्होंने कहा,‘‘आतंकवादी किसी भी समुदाय में हो सकते हैं. 1990के दशक में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के बावजूद, 50,000से अधिक पंडित घाटी के विभिन्न हिस्सों में रहे हैं. आज तक, उन्हें किसी भी तरह से छेड़छाड़ या नुकसान नहीं पहुंचाया गया. वे बिना किसी डर के अपने घरों में रह रहे हैं.

नसीर-उल-इस्लाम ने कहा कि यहां के स्थानीय मुसलमान अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की मदद करने में हमेशा सबसे आगे रहे हैं. उनके अंतिम संस्कार तक में शामिल होते हैं.मैं खुद माखनलाल बांद्रा और प्राचार्य के घर गया. उनके परिवारों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की. मैंने उनसे कहा कि पूरा कश्मीर इस कदम की निंदा करता है और कश्मीरी मुसलमान उनके दुख में शामिल हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग पंडितों और मुसलमानों के बीच कलह फैलाने की कोशिश में हैं, जिसे हम कभी नहीं होने देंगे.‘‘उन्होंने कहा, कश्मीर मुद्दे का न्यायसंगत समाधान खोजना बेहतर है़. यह समस्या सुलझ जाएगी, हत्या और लूट का सिलसिला खत्म हो जाएगा.

उल्लेखनीय है कि घाटी में हाल ही में हुई हत्याओं के बाद गैर स्थानीय कामगारों और कारीगरों में दहशत का माहौल है. ज्यादातर मजदूर घर लौट रहे हैं. श्रमिकों के स्थानांतरण के बारे में एक सवाल के जवाब में, मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने कहा कि जब गोलीबारी और ग्रेनेड विस्फोट हो रहे थे, तब भी उन्होंने दुबई या किसी अन्य स्थान पर जाने के बजाय कश्मीर आना पसंद किया.

इन हत्याओं के बाद बेशक उनमें डर पैदा हो गया है. हम इससे वाकिफ हैं. हम उनसे अपील करते हैं कि कश्मीर छोड़कर वापस न जाएं. इनकी रक्षा करना हमारा दायित्व और कर्तव्य है.कश्मीर में शिया मुसलमानों के सबसे बड़े संगठन अंजुमन-ए-शरिया शिया जम्मू और कश्मीर के अध्यक्ष सैयद आगा सैयद हसन ने हत्याओं की निंदा करते हुए कहा, ‘‘हम इसे एक साजिश के रूप में देखते हैं.‘‘

उन्होंने आवाज द वाॅयस से कहा, ‘‘यह कश्मीर और कश्मीरवाद को बदनाम करने की एक नापाक साजिश है. कश्मीर की लंबे समय से चली आ रही भाईचारे की परंपरा को ठेस पहुंचाने के लिए उपद्रवियों द्वारा हत्याएं सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने के लिए की जा रही हैं.

कश्मीर के प्रमुख वकील और विश्लेषक रियाज खरवार ने हत्याओं को कायरतापूर्ण कृत्य करार दिया और भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से हत्याओं की जांच करने की अपील की.कहा,‘‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं,‘‘ उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि यह एक साजिश के तहत किया जा रहा है.

हत्याओं का उद्देश्य कश्मीरी राष्ट्र को बदनाम करना है. उन्होंने कहा, ‘कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है और यह साजिशों का अड्डा रहा है.‘‘इस तरह की लक्षित हत्याओं से समस्या का समाधान नहीं होगा. ‘‘लोगों को विश्वास में लेने की जरूरत है. जब तक लोगों को विश्वास में नहीं लिया जाता है. लोकतांत्रिक अधिकार नहीं दिए जाते हैं, ऐसे कायरतापूर्ण कृत्यों को करने वालों का समर्थन जारी रहेगा.‘‘

रियाज खरवार ने कहा कि ये सांप्रदायिक हत्याएं नहीं हैं, बल्कि कश्मीर भाईचारे को आहत करने की कोशिश हैं. इन हत्याओं के लिए कश्मीर के लोगों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए. ‘‘हर किसी को कश्मीर आने और यहां काम करने का मूल अधिकार है. गैर देशी मजदूर हमारे मेहमान हैं. हम उनके बिना अधूरे हैं और वो हमारे बिना अधूरे हैं. हम उनसे अपील करते हैं कि वे वापस न जाएं.

उन्होंने आगे कहा कि श्रमिकों को विश्वास में लेने की जरूरत है. उन्हें आश्वस्त करने की जरूरत है कि वे कश्मीर में सुरक्षित हैं. ‘‘कश्मीरी लोगों को सुरक्षा के साथ उनकी मदद करनी चाहिए और भारत के साथ दुनिया को यह संदेश देना चाहिए कि हम हमेशा उनकी पीड़ा में हिस्सा लेंगे.‘‘

मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा जम्मू-कश्मीर के प्रवक्ता मौलाना एमएस रहमान शम्स ने अल्पसंख्यकों और गैर-स्थानीय कार्यकर्ताओं की हत्या को एक बर्बर कृत्य करार दिया. उन्होंने आवाज द वाॅयस से कहा, ‘‘एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या पूरी मानवता की हत्या है. जिन ताकतों ने ऐसा किया है वे निंदनीय हैं. उनके इस कायरतापूर्ण कृत्य को कश्मीर के लोगों ने कभी माफ नहीं किया है.‘‘

Source: Awaz The Voice

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