पढ़िये रिपोर्ट: ‘सुशांत सिंह के मामले ने देश के करोड़ों लोगों को कैसे हाशिए पर डाल’

कृष्ण कांत

मसला सिर्फ ये नहीं है कि सुशांत सिंह के मामले पर डिबेट क्यों हुई? मसला ये है कि इन छोटे-छोटे बहानों से देश के करोड़ों लोगों को कैसे हाशिए पर डाल दिया जाता है.

क्या किसी चैनल ने बाढ़ पर चर्चा की? क्या किसी ने शिक्षा नीति पर चर्चा की? क्या किसी ने 12 से 15 करोड़ नौकरी जाने पर चर्चा की? क्या किसी ने डूब चुकी अर्थव्यवस्था पर चर्चा की? क्या किसी ने किसान आत्महत्याओं पर चर्चा की? क्या किसी ने मंडियों में नहीं खरीदी जा रहे अनाज और नहीं मिल रहे दाम पर चर्चा की? क्या किसी ने बढ़ती भुखमरी और गरीबी पर चर्चा की? क्या किसी ने संकट में फंसी हजारों जानों की चर्चा की? क्या किसी ने खानाबदोशी को मजबूर लाखों लोगों की चर्चा की? क्या किसी ने निजीकरण पर सार्थक चर्चा की? ऐसे लाखों मुद्दे हैं, क्या किसी ने चर्चा की?

नहीं, क्योंकि विश्वगुरु लोग ये सब नहीं करते. मेन कोर्स हिंदू-मुसलमान है, बाकी टाइम में मसाला परोसते हैं.

एक सुसाइड पर चर्चा करके आप क्या कर लेगें? सवाल तो साधारण खबर चलाकर भी उठाए जा सकते हैं. लेकिन एक व्यक्ति इतना महत्वपूर्ण है कि बाकी देश जाए भाड़ में.

सुशांत सिंह की जान चली गई. मामला संदिग्ध है, लोगों के सामने ये बात आ गई. लेकिन उसमें थ्रिल है, रोमांच है, मसाला है, क्राइम है, जुगुप्सा है, जिज्ञासा है. पूरा दोहन कर लेना है. अब 15 दिन से जितना कवरेज सुशांत को मिला है, उतना किसी को नहीं मिला. शायद मोदी जी सुशांत से आगे होंगे.

जिस बिहार के सुशांत थे, उसी बिहार में बाढ़ आई और दर्जनों जिंदगियां लील गई. हर साल आती है. फिर आई है. लाखों लोग खानाबदोश फिर रहे हैं. उनपर जान का संकट है. बिहार में चुनाव की चर्चा है. असम में भी बाढ़ है. मेरी जानकारी में एक भी चैनल पर एक भी डिबेट इस पर नहीं हुई. सुशांत सिंह केस, जिसकी अभी जांच शुरू ही हुई है, उस पर कई कई घंटों तक कार्यक्रम चल रहे हैं.

मैं ये नहीं कहता कि सुशांत की जिंदगी खत्म हो जाना कोई मसला नहीं है. लेकिन सैकड़ों-हजारों की जान चली जाना कभी भी सबसे जरूरी मुद्दा है, जिसे दरकिनार कर दिया जाता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here