‘गोदी मीडिया ऐसा बंदर है जो सरकार रूपी मदारी के कहने पर नाचता है’

कृष्णकांत

किसानों का आंदोलन गलत। उनका विरोध-प्रदर्शन गलत। विरोध का विचार गलत। समर्थन मूल्य सिस्टम गलत। समर्थन मूल्य की मांग गलत। मंडी सिस्टम गलत। उचित मूल्य की मांग गलत। पंजाब के किसानों का ज्यादा गेहूं-धान उगाना गलत। अलग-अलग राज्यों से दिल्ली की तरफ आना गलत। सरकार से सहायता मांगना गलत। कानून वापसी की मांग गलत। सरकार के सामने जिद करना गलत। अपनी बात सुनाना गलत। गोदी मीडिया को आंदोलन से भगाना गलत। गोदी मीडिया को खालिस्तान-पाकिस्तान एजेंडा चलाने से रोकना गलत।

ये गोदी मीडिया में छपीं सैकड़ों खबरों का सार है। ये वो फैसले हैं जो एक महीने में किसान आंदोलन को लेकर गोदी मीडिया ने सुनाए हैं। कोई अदालत फैसला करते समय दोनों पक्ष सुनती है। गोदी मीडिया अदालत से बड़ा है। वह दूसरा पक्ष नहीं सुनता। वह जनता का पक्ष नहीं सुनता। गोदी मीडिया ऐसा बंदर है जो सरकार रूपी मदारी के कहने पर नाचता है और उसके इशारे पर रुक जाता है।

कुछ चैनल तो एकदम ‘जिहाद’ छेड़े हैं। कभी पाकिस्तानी-खालिस्तानी लिखते हैं, कभी टुकड़े-टुकड़े गैंग लिखते हैं। किसी ने लिखा, ‘ये चीन का आंदोलन है’, किसी ने लिख दिया, ‘ये पाकिस्तान का आंदोलन है। आज देखा एक चैनल किसानों को ‘शैतान’, ‘दरिंदे’ और ‘विकास विरोधी गैंग’ लिख रहा है।

क्या इन्हीं चैनलों ने कभी एक ढंग की खबर इस पर चलाई है कि हर साल तकरीबन 15 हजार किसान देश में खुदकुशी क्यों करते हैं

किसानों ने अपने आंदोलन से गोदी मीडिया को भगाया, लगता है कि सिर्फ इतना ही काफी नहीं है। ऐसा लगता है कि कथित मीडिया ने आंदोलन कर रहे किसानों के खिलाफ दुष्प्रचार युद्ध छेड़ रखा है।

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