‘न्यू इंडिया’: सबको अपना वजूद साबित करना है क्योंकि सबके वजूद पर सवाल है?

किसान को ये साबित करना है कि वह किसान है. नागरिक को ये साबित करना है कि वह नागरिक है. छात्र को ये साबित करना है कि वह छात्र है. प्रोफेसर को साबित करना है कि वह प्रोफेसर है. पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और अर्थशास्त्री सबको अपना वजूद साबित करना है क्योंकि सबके वजूद पर सवाल है.
जिस महिला सामाजिक कार्यकर्ता ने अपना जीवन आदिवासियों की सेवा में गुजार दिया, आज उसे ये साबित करना है कि वह नक्सल आतंकी नहीं है. यही आपका ‘न्यू इंडिया’ है जहां आपको साबित करना है कि आप और आपके बाप यहीं पैदा हुए थे.
अगर किसान होकर आपको अपना हक चाहिए तो पहले साबित कीजिए कि आप किसान हैं. कैसे साबित करेंगे? हजारों लोग और दर्जनों संगठन इस बात के गवाह नहीं हैं कि ये किसानों का आंदोलन है. सरकार उनस बात कर रही है, ये भी कोई सबूत नहीं है. ये बात सिर्फ वॉट्सएप विष-विद्यालय साबित कर सकता है कि किसकी सच्चाई क्या है? वॉट्सएप विष-विद्यालय दुनिया का अकेला फोरेंसिक लैब है और यहां के छात्र दुनिया के अकेले विशेषज्ञ.
अगर आप किसान हैं तो पहले खेत जोतते हुए अपनी फोटो और वीडियो लाइए. देश भर में घूम घूम कर आईटी सेल वालों और उन्माद में पगलाए लोगों के सामने साबित कीजिए कि आप ​किसान हैं.
कुछ लोग चिंता जता रहे हैं कि दिल्ली वालों का सब्जी और दूध बंद हो रहा है. कुछ सालों में ही अकेले पंजाब में कर्ज में डूबे हजारों किसान आत्महत्या कर चुके हैं. सब्जी दूध पैदा करने वालों की सांसें बंद हो रही हैं, लेकिन दिल्ली के बाबू साहबान को दूध वाले के जान की नहीं, बस दूध की परवाह है.
उन्हें सब्जी और दूध चाहिए, अनाज चाहिए, लेकिन इन्हें पैदा करने वाले की सुरक्षा नहीं चाहिए. उन्हें भाषण में सशक्त भारत चाहिए लेकिन मरते हुए किसान, भागते हुए मजदूर, बंद होते उद्योग, बेरोजगार होते युवक दिखाई नहीं देते. यही आपका ‘न्यू इंडिया’ है. ये संवेदनहीनता मध्ययुगीन है लेकिन इस युग में एकदम नई है.

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